कुदरत तेरा रूठना भी जरूरी था,
इंसान का भ्रम टूटना भी जरूरी था,
पत्थर की मूरत को खुदा समझ बैठा था इंसान,
उसका यह भ्रम टूटना भी तो जरूरी था।

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