Rashmirathi by Ramdhari Singh Dinkar | Krishna Karna Conversation

जय दिनकर ????????……. जय रश्मिरथी ????????

जब श्रीकृष्ण दुर्योधन की सभा में शांति दूत बनकर जाते हैं और मात्र पांच गांव की मांग करते हैं।उस पर भी वह मना कर देता है और उल्टा भगवान श्री कृष्ण को ही बंदी बनाना चाहता है। जिसमें वह सफल नहीं हो पाता। वहां से वापसी के मार्ग में उन्हें कर्ण दिखाई देता है। कृष्ण उसे अपने रथ में बिठा लेेते हैं।और उसे उसके जन्म का रहस्य बताते हैं और कहते हैं कि तुम कुंतीपुत्र हो, तुम दुर्योधन का साथ छोड़ दो क्योंकि भगवान जानते हैं कि कर्ण महापराक्रमी है और दुर्योधन कर्ण के दम पर ही यह युद्ध ठाना है।

कर्ण तब दुखी होकर व्यंग्यपूर्वक पूछता है कि आप आज मुझे कुन्तीपुत्र बताते हो। उस दिन कुन्ती ने कुछ क्यों नहीं कहा था, जब मैं द्रोणाचार्य ने मेरी जाति पूछी थी और मैं सूत-पुत्र बना भरी सभा में अपमानित हुआ था।

फिर भी आप मेरे जन्म का रहस्य युधिष्ठिर से मत कहना; क्योंकि मेरे जन्म का रहस्य जानने पर वे ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण अपना राज्य मुझे दे देंगे और मैं वह राज्य दुर्योधन को दे जाऊंगा इतना कहकर और श्रीकृष्ण को प्रणाम कर कर्ण चला जाता है।

इस पूरी घटना को मैंने रामधारी सिंह दिनकर जी के शब्दों में आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। तो धैर्य पूर्वक दिनकर जी की इस अद्भुत रचना का आनंद लीजिए।

कृष्ण-कर्ण संवाद
रश्मिरथी तृतीय सर्ग

लेखक- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर”
आवाज- सचिन शुक्ला

कर्ण की अर्जुन को चुनौती –

जर्मनी के निर्दयी तानाशाह हिटलर की कहानी- https://youtu.be/W01sU7dH5oU
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